Desire Knows No Bounds




Saturday, October 8, 2016

برای تصمیم‌گیری این‌که انشایی «خوب» است یا «بد»، قانون بسیار ساده‌ای داریم: انشا باید واقعی باشد، باید چیزی را که هست تعریف کنیم، چیزی را که می‌بینیم، می‌شنویم و انجام می‌دهیم.
مثلا، ممنوع است که بنویسیم: «مادربزرگ شبیه یک جادوگر است»، اما می‌توانیم بنویسیم: «مردم مادربزرگ را جادوگر صدا می‌کنند».
ممنوع است بنویسیم: «شهر کوچک زیبا است»، چون شاید شهر کوچک از نظر ما زیبا باشد و از نظر کس دیگری زشت.
به همین ترتیب، اگر بنویسیم: «گماشته مهربان است»، حقیقت ندارد، چون شاید گماشته مستعد بدجنسی‌هایی باشد که ما از آن‌ها خبر نداریم. پس فقط می‌نویسیم: «گماشته به ما پتو می‌دهد».
می‌نویسیم: «ما زیاد گردو می‌خوریم»، و نه: «ما گردو دوست داریم»، چون کلمه‌ی «دوست‌داشتن» کلمه‌ی مطمئنی نیست، دقت و عینیت ندارد. «دوست داشتن گردو» و «دوست‌ داشتن مادربزرگ»، این‌ها نمی‌توانند به یک معنا باشند. عبارت اول به طعمی دل‌پذیر توی دهان برمی‌گردد و دومی به یک حس.
کلماتی که احساسات را توصیف می‌کنند خیلی مبهم‌اند؛ باید از کاربرد آن‌ها اجتناب کرد و به شرح اشیا، انسان‌ها و خود اکتفا کرد، در واقع شرح وفادارانه‌ی وقایع.

دفتر بزرگ --- آگوتا کریستوف

پ.ن. دقیقا این درس جلسه‌ی اول ناصر تقوایی بود تو کلاس فیلم‌نامه‌نویسی‌ش.

Labels:



Comments:
سلام. وقت به خیر
مطلب را خودتون ترجمه کردید؟
یا ترجمه شده هست و شما نقل کردید؟
در هر دو صورت، شماره صفحه‌ای که این متن در کتاب آمده است را بفرمایید تا در کانال کتاب‌خوانی‌ام به نقل از مترجمی که می‌فرمایید
ذکر کنم. متشکرم.
با احترام - تقی دژاکام
tdejakam@gmail.com
 
Post a Comment

Archive:
February 2002  March 2002  April 2002  May 2002  June 2002  July 2002  August 2002  September 2002  October 2002  November 2002  December 2002  January 2003  February 2003  March 2003  April 2003  May 2003  June 2003  July 2003  August 2003  September 2003  October 2003  November 2003  December 2003  January 2004  February 2004  March 2004  April 2004  May 2004  June 2004  July 2004  August 2004  September 2004  October 2004  November 2004  December 2004  January 2005  February 2005  March 2005  April 2005  May 2005  June 2005  July 2005  August 2005  September 2005  October 2005  November 2005  December 2005  January 2006  February 2006  March 2006  April 2006  May 2006  June 2006  July 2006  August 2006  September 2006  October 2006  November 2006  December 2006  January 2007  February 2007  March 2007  April 2007  May 2007  June 2007  July 2007  August 2007  September 2007  October 2007  November 2007  December 2007  January 2008  February 2008  March 2008  April 2008  May 2008  June 2008  July 2008  August 2008  September 2008  October 2008  November 2008  December 2008  January 2009  February 2009  March 2009  April 2009  May 2009  June 2009  July 2009  August 2009  September 2009  October 2009  November 2009  December 2009  January 2010  February 2010  March 2010  April 2010  May 2010  June 2010  July 2010  August 2010  September 2010  October 2010  November 2010  December 2010  January 2011  February 2011  March 2011  April 2011  May 2011  June 2011  July 2011  August 2011  September 2011  October 2011  November 2011  December 2011  January 2012  February 2012  March 2012  April 2012  May 2012  June 2012  July 2012  August 2012  September 2012  October 2012  November 2012  December 2012  January 2013  February 2013  March 2013  April 2013  May 2013  June 2013  July 2013  August 2013  September 2013  October 2013  November 2013  December 2013  January 2014  February 2014  March 2014  April 2014  May 2014  June 2014  July 2014  August 2014  September 2014  October 2014  November 2014  December 2014  January 2015  February 2015  March 2015  April 2015  May 2015  June 2015  July 2015  August 2015  September 2015  October 2015  November 2015  December 2015  January 2016  February 2016  March 2016  April 2016  May 2016  June 2016  July 2016  August 2016  September 2016  October 2016  November 2016  December 2016  January 2017  February 2017  March 2017  April 2017  May 2017  June 2017  July 2017  August 2017  September 2017